Sunday, 13 October 2013

विजयादशमी और 21वी सदी


त्यौहारो का चौपाल लगा है,
एक दिवस का संसार लगा है,
माया-मोह-कपट मे देखो,
पुतलो का अंबार लगा है/

त्यौहारो का चौपाल लगा है/

बडे-बडे है देखो रावण,
आग लगाते धरती पावन,
क्रोध-हब्श की प्यास लगी है,
पुतलो मे अंगार लगा है/

त्यौहारो का चौपाल लगा है/

समय-समय की देखो रंजिश,
माता बहने होती शोषित,
काले चेहरो की कश्ती पर,
पुतलो से रोशन संसार खड़ा है/

त्यौहारो का चौपाल लगा है/

विजयादशमी की सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाये/

रचना:

प्रतीक संचेती

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (14-10-2013) विजयादशमी गुज़ारिश : चर्चामंच 1398 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद शास्त्री जी/

      सादर
      प्रतीक संचेती

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